सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई

चौपाई २, दोहा ४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई॥ देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा॥ २ ॥

अर्थ

कृपालु श्रीरघुनाथजी सेतुबन्ध के ढिग चढ़कर समुद्र का विस्तार देखने लगे। करुणाकन्द प्रभु के दर्शन के लिये सब जलचरों के समूह प्रकट हो गये (जल के ऊपर निकल आये)।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।

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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना