सर चाप मनोहर त्रोन धरं

छन्द ७, दोहा १११ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जलजारुन लोचन भूपबरं॥ सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं॥ ७ ॥

अर्थ

आप मनोहर बाण, धनुष और तरकस धारण करनेवाले हैं। [लाल] कमल के समान रक्तवर्ण आपके नेत्र हैं। आप राजाओं में श्रेष्ठ, सुख के मन्दिर, सुन्दर, श्री (लक्ष्मीजी) के वल्लभ तथा मद (अहंकार), काम और झूठी ममता के नाश करनेवाले हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द ७, दोहा १११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा