सब तरु फरे राम हित लागी
सब तरु फरे राम हित लागी
चौपाई ३, दोहा ५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी॥ खाहिं मधुर फल बिटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं॥ ३ ॥
अर्थ
श्रीरामजी के हित (सेवा) के लिये सब तरु फरे, ऋतु अरु कुरितु काल गति त्यागी। खाहिं मधुर फल बिटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम का समुद्र पार, सुबेल पर निवास” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम का सेना सहित समुद्र पार कर सुबेल पर्वत पर डेरा और रावण की व्याकुलता का वर्णन है।
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राम का समुद्र पार, सुबेल पर निवास