रे त्रिय चोर कुमारग गामी
रे त्रिय चोर कुमारग गामी
चौपाई ३, दोहा ३३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी॥ सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा॥ ३ ॥
अर्थ
ओरे स्त्री के चोर! अरे कुमार्ग पर चलनेवाले! अरे दुष्ट, पाप की राशि, मन्दबुद्धि और कामी! तू सन्निपात में क्या दुर्वचन बक रहा है? अरे दुष्ट राक्षस! तू काल के वश हो गया है!
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद