राम सरिस को दीन हितकारी
राम सरिस को दीन हितकारी
चौपाई ५, दोहा ११४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी॥ खल मल धाम कामरत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न॥ ५ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के समान दीनों का हित करनेवाला कौन है? जिन्होंने सारे राक्षसों को मुक्त कर दिया! दुष्ट, पापों के घर और कामी रावण ने भी वह गति पायी जिसे श्रेष्ठ मुनि भी नहीं पाते।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ११४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।
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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा