राम मनुज कस रे सठ बंगा

चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा॥ पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा॥ ३ ॥

अर्थ

क्यों रे मूर्ख उद्दण्ड! श्रीरामचन्द्रजी मनुष्य हैं? कामदेव भी क्या धनुर्धारी है? और नदी फिर गंगा है? कामधेनु क्या पशु है? और कल्पवृक्ष क्या पेड़ है? अन्न भी क्या दान है? और अमृत क्या रस है ?।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद