प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि

सोरठा १७ (क) · लंकाकाण्ड

सोरठा पाठ

प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ। सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु॥ १७ (क) ॥

अर्थ

प्रभु की आज्ञा सिर पर धरकर और उनके चरणों की वन्दना करके अंगद उठे [और बोले--] हे भगवान् श्रीरामजी! आप जिस पर कृपा करें, वही गुणों का समुद्र हो जाता है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का सोरठा १७ (क) है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

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मंदोदरी का राम-महिमा कथन