पवनतनय मन भा अति क्रोधा

चौपाई ३, दोहा ४३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा॥ कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा॥ ३ ॥

अर्थ

तब पवनपुत्र हनुमानजी के मन में बड़ा भारी क्रोध हुआ। वे काल के समान योद्धा बड़े जोर से गरजे और कूदकर लंका गढ़ पर आ गये और पहाड़ लेकर मेघनाद की ओर दौड़े।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
युद्धारम्भ