पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा
पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा
चौपाई २, दोहा ९१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा॥ छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरघुवीर ने अग्निबाण छोड़ा, [जिससे] रावण के सब बाण क्षणभर में भस्म हो गये। तब उसने खिसियाकर तीक्ष्ण शक्ति छोड़ी। [किन्तु] श्रीरामचन्द्रजी ने उसको बाण के साथ वापस भेज दिया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।
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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध