कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर
कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर
चौपाई १, दोहा ९१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर॥ नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिसि गगन महि छाए॥ १ ॥
अर्थ
दुर्वचन कहकर रावण क्रुद्ध होकर वज्र के समान बाण छोड़ने लगा। अनेकों आकार के बाण दौड़े और दिशा, विदिशा तथा आकाश और पृथ्वी में, सब जगह छा गये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।
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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध