पठवहु नाथ बेगि भट बंदर
पठवहु नाथ बेगि भट बंदर
चौपाई २, दोहा ८५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर॥ प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए॥ २ ॥
अर्थ
हे नाथ! तुरंत वानर योद्धाओं को भेजिये; जो यज्ञ का विध्वंस करें, जिससे रावण युद्ध में आवे। प्रातःकाल होते ही प्रभु ने वीर योद्धाओं को भेजा। हनुमान् और अंगद आदि सब [प्रधान वीर] दौड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।
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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध