निज बिकलता बिचारि बहोरी

चौपाई १, दोहा ६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ गृह करि भय भोरी॥ मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो॥ १ ॥

अर्थ

फिर अपनी व्याकुलता को समझकर [ऊपर से] हँसता हुआ, भय को भुलाकर रावण महल को गया। मन्दोदरी ने सुना कि प्रभु श्रीरामजी आ गये हैं और उन्होंने कौतुक में ही समुद्र को बँधवा लिया है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को उपदेश