नाभिकुंड पियूष बस याकें

चौपाई ३, दोहा १०२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें॥ सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला॥ ३ ॥

अर्थ

इसके नाभिकुण्ड में अमृत का निवास है। हे नाथ! रावण उसी के बल पर जीता है। विभीषण के वचन सुनते ही कृपालु श्रीरघुनाथजी ने हर्षित होकर हाथ में विकराल बाण लिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध