मुनि जेहि ध्यान न पावहिं नेति
मुनि जेहि ध्यान न पावहिं नेति
दोहा ११७ (क) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
मुनि जेहि ध्यान न पावहिं नेति नेति कह बेद। कृपासिंधु सोइ कपिन्ह सन करत अनेक बिनोद॥ ११७ (क) ॥
अर्थ
जिनको मुनि ध्यान में भी नहीं पाते, जिन्हें वेद नेति-नेति कहते हैं, वे ही कृपा के समुद्र श्रीरामजी वानरों के साथ अनेकों प्रकार के विनोद कर रहे हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना” प्रकरण का दोहा ११७ (क) है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा वानरों और भालुओं पर वस्त्र-आभूषण बरसाने और उनके हर्षपूर्वक धारण करने का वर्णन है।
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विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना