मंदोदरी बचन सुनि काना

चौपाई १, दोहा १०५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना॥ अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी॥ १ ॥

अर्थ

मन्दोदरी के वचन कानों से सुनकर देवता, मुनि और सिद्ध सभी ने सुख माना। ब्रह्मा, महादेव, नारद और सनकादि, तथा जो मुनिवर परमार्थवादी थे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मन्दोदरी के विलाप और विभीषण द्वारा रावण की अन्त्येष्टि क्रिया का वर्णन है।

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मन्दोदरी विलाप, रावण की अन्त्येष्टि