मज्जहिं भूत पिसाच बेताला
मज्जहिं भूत पिसाच बेताला
चौपाई १, दोहा ८८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
मज्जहिं भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला॥ काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं॥ १ ॥
अर्थ
भूत, पिशाच और बैताल, बड़े-बड़े झोटिंग कराल प्रमथ (शिवगण) उस नदी में स्नान करते हैं। कौए और चील भुजाएँ लेकर उड़ते हैं और एक दूसरे से छीनकर खा जाते हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।
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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध