खर दूषन बिराध तुम्ह मारा

चौपाई ३, दोहा ९० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा॥ निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु॥ ३ ॥

अर्थ

तुमने खर, दूषण और विराध को मारा। बेचारे बाली को व्याध की तरह वध किया। बड़े-बड़े राक्षस योद्धाओं के समूह का संहार किया और कुम्भकर्ण तथा मेघनाद को भी मारा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध