काटें भुजा सोह खल कैसा
काटें भुजा सोह खल कैसा
चौपाई ६, दोहा ७० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा॥ उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रैलोका॥ ६ ॥
अर्थ
भुजाओं के कट जाने पर वह दुष्ट कैसी शोभा पाने लगा, जैसे बिना पंख का मन्दराचल पहाड़ हो। उसने उग्र दृष्टि से प्रभु को देखा। मानो तीनों लोकों को निगल जाना चाहता हो।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति