काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि
काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि
दोहा ९९ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि तव ध्यान। तब रावनहि हृदय महुँ मरिहहिं रामु सुजान॥ ९९ ॥
अर्थ
सिरों के बार-बार काटे जाने से जब वह व्याकुल हो जायगा और उसके हृदय से तुम्हारा ध्यान छूट जायगा, तब सुजान (अन्तर्यामी) श्रीरामजी रावण के हृदय में बाण मारेंगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का दोहा ९९ है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद