कर सारंग साजि कटि भाथा

चौपाई १, दोहा ६८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा॥ प्रथम कीन्हि प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा॥ १ ॥

अर्थ

हाथ में सारंग सजाकर और कमर में तरकस बांधकर श्रीरघुनाथजी शत्रु-सेना का दलन करने चले। प्रभु ने पहले धनुष का टंकार किया, जिसकी भयानक आवाज सुनते ही शत्रुदल बहरा हो गया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।

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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति