कपिपति नील रीछपति अंगद नल हनुमान

दोहा ११८ (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

कपिपति नील रीछपति अंगद नल हनुमान। सहित बिभीषन अपर जे जूथप कपि बलवान॥ ११८ (ख) ॥

अर्थ

वानरराज सुग्रीव, नील, रीछपति जाम्बवान्, अंगद, नल और हनुमान् तथा विभीषण सहित और जो बलवान वानर सेनापति हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना” प्रकरण का दोहा ११८ (ख) है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा वानरों और भालुओं पर वस्त्र-आभूषण बरसाने और उनके हर्षपूर्वक धारण करने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना