किए सुखी कहि बानी सुधा सम
किए सुखी कहि बानी सुधा सम
छन्द, दोहा १०६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
किए सुखी कहि बानी सुधा सम बल तुम्हारें रिपु हयो। पायो बिभीषन राज तिहुँ पुर जसु तुम्हारो नित नयो॥ मोहि सहित सुभ कीरति तुम्हारी परम प्रीति जो गाइहैं। संसार सिंधु अपार पार प्रयास बिनु नर पाइहैं॥
अर्थ
अमृत के समान यह वाणी कहकर सबको सुखी किया कि तुम्हारे ही बल से यह प्रबल शत्रु मारा गया और विभीषण ने राज्य पाया। इसके कारण तुम्हारा यश तीनों लोकों में नित्य नया बना रहेगा। जो लोग मेरे सहित तुम्हारी शुभ कीर्ति को परम प्रेम के साथ गायेंगे वे बिना ही परिश्रम इस अपार संसार-सागर का पार पा लेंगे॥
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का राज्याभिषेक” प्रकरण का छन्द, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम की आज्ञा से विभीषण का लंका के राजा के रूप में राजतिलक एवं धर्म-स्थापना का वर्णन है।
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विभीषण का राज्याभिषेक