जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा
चौपाई ४, दोहा ९९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा॥ जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए॥ ४ ॥
अर्थ
जिसने कपट का झूठा स्वर्णमृग बनाया था, वही दैव अब भी मुझ पर रूठा हुआ है। जिस विधाता ने मुझसे दुःसह दुःख सहन कराये और लक्ष्मण को कड़ुवे वचन कहलाये,
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद