जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं
चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं॥ जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि॥ १ ॥
अर्थ
जो मनुष्य [मेरे स्थापित किये हुए इन] रामेश्वरजी का दर्शन करेंगे, वे शरीर छोड़कर मेरे लोक को जायँगे। और जो गंगाजल लाकर इन पर चढ़ायेगा, वह मनुष्य सायुज्य मुक्ति पावेगा (अर्थात् मेरे साथ एक हो जायगा)।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।
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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना