जय राम सोभा धाम

छन्द १, दोहा ११३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम॥ धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप॥ १ ॥

अर्थ

शोभा के धाम, शरणागत को विश्राम देनेवाले, धृत त्रोन, वर सर चाप, प्रबल प्रतापी भुजदण्डोंवाले श्रीरामचन्द्रजी की जय हो !

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द १, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा