ईस भजनु सारथी सुजाना

चौपाई ४, दोहा ८० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना॥ दान परसु बुधि सक्ति प्रचंडा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा॥ ४ ॥

अर्थ

ईश्वर का भजन ही [उस रथ को चलाने वाला] चतुर सारथि है। वैराग्य ढाल है और सन्तोष तलवार है। दान फरसा है, बुद्धि प्रचण्ड शक्ति है, श्रेष्ठ विज्ञान कठिन धनुष है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।

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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ