इहाँ राम अंगदहि बोलावा
इहाँ राम अंगदहि बोलावा
चौपाई २, दोहा ३८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा॥ अति आदर समीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी॥ २ ॥
अर्थ
यहाँ श्रीरामजी ने अंगद को बुलाया। उन्होंने आकर चरण-कमलों में सिर नवाया। बड़े आदर से उन्हें पास बैठाकर खर के शत्रु कृपालु श्रीरामजी हँसकर बोले।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना