बालितनय कौतुक अति मोही
बालितनय कौतुक अति मोही
चौपाई ३, दोहा ३८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही॥ रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका॥ ३ ॥
अर्थ
हे बालि के पुत्र! मुझे बड़ा कौतूहल है। हे तात! इसी से मैं तुमसे पूछता हूँ, सत्य कहना। जो रावण राक्षसों के कुल का तिलक है और जिसके अतुलनीय बाहुबल की जगत् भर में धाक है,
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना