एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं
एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं
दोहा ४४ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड। रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड॥ ४४ ॥
अर्थ
एक को दूसरे से [रगड़कर] मसल डालते हैं और सिरों को तोड़कर फेंकते हैं। वे सिर जाकर रावण के सामने गिरते हैं और ऐसे फूटते हैं मानो दही के कूँड़े फूट रहे हों।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का दोहा ४४ है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ