एहीं बीच निसाचर अनी
एहीं बीच निसाचर अनी
चौपाई १, दोहा ८७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी॥ देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा॥ १ ॥
अर्थ
इसी बीच में निशाचरों की अत्यन्त घनी सेना कसमसाती हुई (आपस में टकराती हुई) आयी। उसे देखकर वानर योद्धा इस प्रकार सामने चले जैसे प्रलयकाल के बादलों के समूह हों।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।
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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध