एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना
एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना
चौपाई ५, दोहा ७२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना॥ इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा॥ ५ ॥
अर्थ
इस प्रकार डींग मारते हुए सबेरा हो गया। लंका के चारों दरवाजों पर बहुत-से वानर आ डटे। इधर काल के समान वीर वानर-भालू हैं और उधर अत्यन्त रणधीर राक्षस।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति