दीन बंधु दयाल रघुराया

चौपाई २, दोहा ११० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया॥ बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी॥ २ ॥

अर्थ

हे दीनबन्धु ! हे दयालु रघुराज! हे परमदेव! आपने देवताओं पर बड़ी दया की। विश्व के द्रोह में तत्पर यह दुष्ट, कामी और कुमार्ग पर चलनेवाला रावण अपने ही पाप से नष्ट हो गया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा