दिगपालन्ह मैं नीर भरावा
दिगपालन्ह मैं नीर भरावा
चौपाई ३, दोहा २८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा॥ जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा॥ ३ ॥
अर्थ
ओरे दुष्ट! मैंने दिक्पालोंतकसे जल भरवाया और तू एक राजा का मुझे सुयश सुनाता है! यदि तेरा मालिक, जिसकी गुणगाथा तू बार-बार कह रहा है, संग्राम में लड़नेवाला योद्धा है--।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद