देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल

दोहा ४६ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार। एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार॥ ४६ ॥

अर्थ

दसों दिशाओं में अत्यन्त घना अन्धकार देखकर वानरों की सेना में खलबली पड़ गयी। एक को एक नहीं देख सकता और सब जहाँ-तहाँ पुकार कर रहे हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का दोहा ४६ है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

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युद्धारम्भ