भयउ निमिष महँ अति अँधिआरा
भयउ निमिष महँ अति अँधिआरा
चौपाई ६, दोहा ४६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
भयउ निमिष महँ अति अँधिआरा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा॥ ६ ॥
अर्थ
पलभर में अत्यन्त अन्धकार हो गया। खून, पत्थर और राख की वर्षा होने लगी।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ