देखे कपिन्ह अमित दससीसा

चौपाई २, दोहा ९६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा॥ भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा॥ २ ॥

अर्थ

वानरों ने अपरिमित रावण देखे। भालू और वानर सब जहाँ-तहाँ (इधर-उधर) भाग चले। वानर धीरज नहीं धरते। हे लक्ष्मणजी! हे रघुवीर! बचाइये, बचाइये, यों पुकारते हुए वे भागे जा रहे हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण की माया, राम द्वारा नाश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मायावी युद्धलीला और राम द्वारा उसका नाश का वर्णन है।

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रावण की माया, राम द्वारा नाश