देखा सैल न औषध चीन्हा

चौपाई ४, दोहा ५८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा॥ गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी ऊपर कपि गयऊ॥ ४ ॥

अर्थ

उन्होंने पर्वत को देखा, पर औषध न पहचान सके। तब हनुमानजी ने एकदम से पर्वत को ही उखाड़ लिया। पर्वत लेकर हनुमानजी रात ही में आकाशमार्ग से दौड़ चले और अयोध्यापुरी के ऊपर पहुँच गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान