दस दिसि दाह होन अति लागा
दस दिसि दाह होन अति लागा
चौपाई ५, दोहा १०२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा॥ मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्रवहिं नयन मग बारी॥ ५ ॥
अर्थ
दसों दिशाओं में अत्यन्त दाह होने लगा (आग लगने लगी)। बिना ही पर्व (योग) के सूर्यग्रहण होने लगा। मन्दोदरी का हृदय बहुत काँपने लगा। मूर्तियाँ नेत्र-मार्ग से जल बहाने लगीं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।
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राम-रावण युद्ध, रावण वध