छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे

दोहा ६८ · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच। पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच॥ ६८ ॥

अर्थ

प्रभु के बाणों ने क्षणमात्र में भयानक राक्षसों को काटकर रख दिया। फिर वे सब बाण लौटकर श्रीरघुनाथजी के तरकस में घुस गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का दोहा ६८ है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।

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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति