भय आतुर कपि भागन लागे
भय आतुर कपि भागन लागे
चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे॥ कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता॥ १ ॥
अर्थ
[शिवजी कहते हैं-- ] वानर भयातुर होकर (डर के मारे घबड़ाकर) भागने लगे, यद्यपि हे उमा! आगे चलकर [वे ही] जीतेंगे। कोई कहता है-- अंगद-हनुमान् कहाँ हैं? बलवान् नल, नील और द्विविद कहाँ हैं?
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ