भालु कपिन्ह पट भूषन पाए
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए
चौपाई १, दोहा ११८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए॥ नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा॥ १ ॥
अर्थ
भालुओं और वानरों ने कपड़े-गहने पाये और उन्हें पहन-पहनकर वे श्रीरघुनाथजी के पास आये। अनेकों जातियों के वानरों को देखकर कोसलपति श्रीरामजी बार-बार हँस रहे हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा वानरों और भालुओं पर वस्त्र-आभूषण बरसाने और उनके हर्षपूर्वक धारण करने का वर्णन है।
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विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना