भागे भालु बलीमुख जूथा
भागे भालु बलीमुख जूथा
चौपाई १, दोहा ७० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा॥ चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी॥ १ ॥
अर्थ
यह देखकर रीछ-वानरों के झुंड ऐसे भागे जैसे भेड़िये को देखकर भेड़ों के झुंड। [शिवजी कहते हैं--] हे भवानी! वानर-भालू व्याकुल होकर आर्तवाणी से पुकारते हुए भाग चले।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति