बहु राम लछिमन देखि मर्कट भालु
बहु राम लछिमन देखि मर्कट भालु
छन्द, दोहा ८९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
बहु राम लछिमन देखि मर्कट भालु मन अति अपडरे। जनु चित्र लिखित समेत लछिमन जहँ सो तहँ चितवहिं खरे॥ निज सेन चकित बिलोकि हँसि सर चाप सजि कोसलधनी। माया हरी हरि निमिष महुँ हरषी सकल मर्कट अनी॥
अर्थ
बहुत-से राम और लक्ष्मण देखकर वानर-भालू मन में बहुत ही डर गये। लक्ष्मणजी सहित वे मानो चित्र लिखे-से जहाँ-तहाँ खड़े देखने लगे। अपनी सेना को चकित देखकर कोसलधनी ने हँसकर धनुष पर बाण चढ़ाया और पलभर में सारी माया हर ली। वानरों की सारी सेना हर्षित हो गयी॥
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का छन्द, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।
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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध