अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ
दोहा १३ (ख) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग। रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग॥ १३ (ख) ॥
अर्थ
ऐसा कौतुक करके श्रीरामजी का बाण [वापस] आकर [फिर] तरकस में जा घुसा। यह महान् रस-भंग (रंग में भंग) देखकर रावण की सारी सभा भयभीत हो गयी।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना” प्रकरण का दोहा १३ (ख) है। इस प्रकरण में श्रीराम के बाण से रावण के मुकुट और छत्र के गिरने तथा उसके अभिमान के भंग होने का वर्णन है।
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राम के बाण से रावण का मुकुट गिरना