अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता
चौपाई १, दोहा १०८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता॥ तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई॥ १ ॥
अर्थ
हे तात! अब तुम वही उपाय करो जिससे मैं इन नेत्रों से प्रभु के कोमल श्याम शरीर के दर्शन करूँ। तब श्रीरामचन्द्रजी के पास जाकर हनुमानजी ने जानकीजी का कुशल-समाचार सुनाया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।
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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा