उमा दारु जोषित की नाईं
उमा दारु जोषित की नाईं
चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
उमा दारु जोषित की नाईं। सबहि नचावत रामु गोसाईं॥ तब सुग्रीवहि आयसु दीन्हा। मृतक कर्म बिधिवत सब कीन्हा॥ ४ ॥
अर्थ
शिवजी कहते हैं-- हे उमा! स्वामी श्रीरामजी सबको कठपुतली की तरह नचाते हैं। तदनन्तर श्रीरामजी ने सुग्रीव को आज्ञा दी और सुग्रीव ने विधिपूर्वक बालि का सब मृतक-कर्म किया।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तारा के विलाप पर श्रीराम के उपदेश, सुग्रीव का राज्याभिषेक और अंगद को युवराज पद का वर्णन है।
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तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक