राम कहा अनुजहि समुझाई

चौपाई ५, दोहा ११ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

राम कहा अनुजहि समुझाई। राज देहु सुग्रीवहि जाई॥ रघुपति चरन नाइ करि माथा। चले सकल [प्रेरित रघुनाथा॥ ५ ॥

अर्थ

तब श्रीरामचन्द्रजी ने छोटे भाई लक्ष्मण को समझाकर कहा कि तुम जाकर सुग्रीव को राज्य दे दो। श्रीरघुनाथजी की प्रेरणा (आज्ञा) से सब लोग श्रीरघुनाथजी के चरणों में मस्तक नवाकर चले।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तारा के विलाप पर श्रीराम के उपदेश, सुग्रीव का राज्याभिषेक और अंगद को युवराज पद का वर्णन है।

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तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक