प्रगट सो तनु तव आगें सोवा
प्रगट सो तनु तव आगें सोवा
चौपाई ३, दोहा ११ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रगट सो तनु तव आगें सोवा। जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा॥ उपजा ग्यान चरन तब लागी। लीन्हेसि परम भगति बर मागी॥ ३ ॥
अर्थ
वह शरीर तो प्रत्यक्ष तुम्हारे सामने सोया हुआ है, और जीव नित्य है। फिर तुम किसके लिये रो रही हो? जब ज्ञान उत्पन्न हो गया, तब वह भगवान् के चरणों लगी और उसने परम भक्ति का वर माँग लिया।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तारा के विलाप पर श्रीराम के उपदेश, सुग्रीव का राज्याभिषेक और अंगद को युवराज पद का वर्णन है।
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तारा का विलाप, सुग्रीव का राज्याभिषेक