ठाढ़े जहँ तहँ आयसु पाई
ठाढ़े जहँ तहँ आयसु पाई
चौपाई ३, दोहा २२ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
ठाढ़े जहँ तहँ आयसु पाई। कह सुग्रीव सबहि समुझाई॥ राम काजु अरु मोर निहोरा। बानर जूथ जाहु चहुँ ओरा॥ ३ ॥
अर्थ
आज्ञा पाकर सब जहाँ-तहाँ खड़े हो गये। तब सुग्रीव ने सबको समझाकर कहा कि हे वानरों के समूहो! यह श्रीरामचन्द्रजी का कार्य है और मेरा निहोरा (अनुरोध) है; तुम चारों ओर जाओ।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान