जनकसुता कहुँ खोजहु जाई
जनकसुता कहुँ खोजहु जाई
चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
जनकसुता कहुँ खोजहु जाई। मास दिवस महँ आएहु भाई॥ अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाएँ। आवइ बनिहि सो मोहि मराएँ॥ ४ ॥
अर्थ
और जाकर जानकीजी को खोजो। हे भाई! महीने भर में वापस आ जाना। जो अवधि बिताकर बिना सुधि पाए लौट आएगा, उसे मेरे द्वारा मरवाना ही पड़ेगा।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान